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Anant chaturdashi 2016 vrat Katha in Hindi Happy Ganesh Chaturthi Images

Anant chaturdashi 2016 vrat Katha in Hindi  Happy Ganesh Chaturthi Images

Anant chaturdashi 2016 vrat Katha in Hindi – गणेश चतुर्थी  के दिन पुरे देश में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। देश के लगभग सभी शहरों और गांवों में उनकी जगह जगह मूर्तियों की स्थापना की जाटी है। इस अवसर पर गणेशोत्सव भी मनाया जाता है जिस पर अनेक प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। गणेश उत्सव के दौरान होने वाले कार्यक्रमों में लोग बहुत उत्साह से शामिल होते हैं।

भगवान श्रीगणेश ही का हमारे जीवन में कितना धार्मिक महत्व यह इसी बात से समझा जा सकता है कि किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में उनका स्मरण किया जाता है। इसका कारण उनको भगवान शिव तथा अन्य देवताओं द्वारा दिया गया है वह वरदान है जो उनको अपने बौद्धिक कौशल के कारण मिला था।

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Anant chaturdashi 2016 vrat Katha in Hindi –

 

श्री गणेश अनन्त चतुर्दशी व्रत कथा

श्री गणेश चतुर्थी व्रत को पर एक पौराणिक कथा प्रचलन में है। कथा केमें कहा गया है कि एक बार भगवान शंकर और माता पार्वती नर्मदा नदी केकिनारे पीपल की ठंडी छाँव में बैठे थें। वहां देवी पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से समय व्यतीत करने के लिये चौपड खेलने की विनती की। भगवान शंकर पार्वती की इस को मानकर चौपड खेलने के लिये तो तैयार हो गये। लेकिन अब उनके सामने एक समस्या थी कि इस खेल मे हार-जीत का फैसला कौन करेगा?

इस परस्थिति से निपटने के लिए जवाब में भगवान भोलेनाथ ने कुछ तिनके एकत्रित किये और एक पुतला बना दिया। और उसमें प्राण प्रतिष्ठा कर दी। पुतले से कहा कि बेटा हम चौपड खेलना चाहते है। परन्तु हमारी हार-जीत पर निर्णय लेने वाला कोई नहीं है। इसलिये तुम बताना की हम मे से कौन जीता और कौन हारा।

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Anant chaturdashi 2016 vrat Katha or puja vidhi in Hindi

इतना करने के बाद चौपड का खेल शुरु हो गया। खेल तीन बार खेला गया, और किसी संयोग से तीनों बार माता पार्वती जी ही जीत गई। खेल की पूरी चालें समाप्त होने पर बालक से हार-जीत का फैसला करने के लिये कहा गया। तो बालक ने महादेव को विजयी बताया। इस फैसले को सुनकर माता पार्वती क्रोधित हो गई। और उन्होंने क्रोध में आकर बालक को लंगडा होने व किचड में पडे रहने का श्राप दे दिया। बालक ने माता से माफी मांगते हुए कहा की मुझसे किसी अज्ञानता वश ऎसा हुआ। मैनें किसी द्वेष में आकर ऎसा नहीं किया। माता जी मुझे क्षमा किया जाए। इस भोली विनती पर माता ने कहा की यहां गणेश पूजन के लिये नाग कन्याएं आयेंगी, उनके कहे अनुसार तुम गणेश व्रत करो, ऎसा करने से तुम मुझे प्राप्त करोगें, यह कहकर माता, भगवान शिव के साथ कैलाश पर्वत पर चली गई।

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Anant chaturdashi 2016 vrat Katha or puja vidhi in Hindi

Anant chaturdashi 2016 vrat Katha in Hindi

समय बीतता गया और ठीक एक साल बाद  उस स्थान पर नाग कन्याएं आईं।  नाग कन्याओं से श्री गणेश के व्रत की विधि मालुम करने पर उस बालक ने 21 दिन लगातार गणेश जी का व्रत किया। उसकी श्रद्वा देखकर गणेश जी प्रसन्न होकर बालक को मनोवांछित फल मांगने के लिये कहा।  बालक ने अपने वरदान में माँगा कि विनायक मुझमें इतनी शक्ति दीजिए, कि मैं अपने पैरों से चलकर अपने माता-पिता के साथ कैलाश पर्वत पर पहुंच सकूं और वो यह देख प्रसन्न हों।

बालक को यह वरदान देकर। श्री गणेश अन्तर्धान हो गए। यह  बालक इसके बाद कैलाश पर्वत पर पहुंचकर अपनी यह कथा उसने भगवान महादेव को सुनाई। उस दिन से पार्वती जी शिवजी से विमुख हो गई। देवी के रुष्ठ होने पर भगवान शंकर ने भी बालक के बताये अनुसार श्री गणेश का व्रत 21 दिनों तक किया। सके प्रभाव से माता के मन से भगवान भोलेनाथ के लिये जो नाराजगी थी। वह समाप्त हो गई वह प्रसन्न होकर यह विधि जाननी चाही।

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Anant chaturdashi 2016 vrat Katha or puja vidhi in Hindi

यह व्रत विधि भगवन शंकर ने माता पार्वती को बताई। यह सुन माता पार्वती के मन में भी अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा जाग्रत हुई। माता ने भी 21 दिन तक श्री गणेश व्रत किया और दुर्वा, पुष्प और लड्डूओं से श्री गणेश जी का पूजन किया।  व्रत के 21 वें दिन कार्तिकेय स्वयं पार्वती जी से आ मिलें। उस दिन से श्री गणेश चतुर्थी का व्रत मनोकामना पूरी करने वाला व्रत माना जाता है।

श्री गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन हुआ था. इसलिये इनके जन्म दिवस को व्रत कर श्री गणेश जन्मोत्सव के रुप में मनाया जाता है. जिस वर्ष में यह व्रत रविवार और मंगलवार के दिन का होता है. उस वर्ष में इस व्रत को महाचतुर्थी व्रत कहा जाता है।

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 गणेश चतुर्थी  का व्रत करने की विधि

इस व्रत को करने की विधि भी श्री गणेश के अन्य व्रतों के समान ही आसान है। गणेश चतुर्थी व्रत प्रत्येक मास में कृ्ष्णपक्ष की चतुर्थी में किया जाता है। लेकिन इस व्रत की यह विशेषता है, कि यह व्रत सिद्धि विनायक श्री गणेश के जन्म दिवस के दिन किया जाता है। यह व्रत सभी 12 चतुर्थियों में माघ, श्रावण, भाद्रपद और मार्गशीर्ष माह में पडने वाली चतुर्थी को करने पर विशेष कल्याणकारी होता है।

व्रत के दिन उपवासक को प्रात:काल में जल्द उठना चाहिए। सूर्योदय से पूर्व उठकर, स्नान और अन्य नित्यकर्म कर, सारे घर को गंगाजल से शुद्ध कर लेना चाहिए।स्नान करने के लिये भी अगर सफेद तिलों के घोल को जल में मिलाकर स्नान किया जाता है। तो शुभ रहता है. प्रात: श्री गणेश की पूजा करने के बाद, दोपहर में गणेश के बीजमंत्र ऊँ गं गणपतये नम: का जाप करना चाहिए।

इसके पश्चात भगवान श्री गणेश  धूप, दूर्वा, दीप, पुष्प, नैवेद्ध व जल आदि से पूजन करना चाहिए. और भगवान श्री गणेश को लाल वस्त्र धारण कराने चाहिए. अगर यह संभव न हों, तो लाल वस्त्र का दान करना चाहिए।

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गणेश चतुर्थी उत्सव 10 दिनों के लिये अगस्त और सितंबर में मनाया जाता है गणेश चतुर्थी पूजा दो प्रक्रियाओं में पूर्ण होती है। पहली मूर्ति स्थापना और दूसरी मूर्ति विसर्जन । हिन्दू धर्म में एक रीति के अनुसार जिस दिन मूर्ति को घर में लाया जाता है उस दिन प्राणप्रतिष्ठा पूजा की जाती है तथा शोधसोपचरा में १६ तरीको से उसकी पूजा की जाती है । 10 दिनों की पूजा के दौरान कपूर, लाल चन्दन, लाल फूल, नारियल, गुड़, मोदक और दुरवा घास चढ़ाने की प्रथा है। पूजा की समाप्ति के समय गणेश विसर्जन में लोगों भारी भीड़ विघ्नहर्ता को खुशी-खुशी विदा करती है।

 

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